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दि.प.ला. द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत दिनांक 30.7.20 को मुख्यालय सहित विभिन्न शाखाओं में स्वच्छता शपथ ली गयी तथा “स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए एकल उपयोग प्लास्टिक हानिकारक है” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम (वेबिनार) का आयोजन

प्रत्येक वर्ष की भाति इस वर्ष भी दिल्ली पब्लिक लाईब्रेरी दिनांक 27 जुलाई 2020 से 8 अगस्त 2020 तक स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन कर रही है इसी के अंतर्गत दिनांक 30 जुलाई 2020 को मुख्यालय सहित पुस्तकालय की विभिन्न शाखाओं में उपस्थित सभी कर्मचारियों को स्वच्छता शपथ दिलाई गयी तथा पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अपना योगदान देने के लिए सभी कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया गया साथ ही “स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए एकल उपयोग प्लास्टिक हानिकारक है” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम (वेबिनार) का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाईब्रेरी बोर्ड के सानिध्य में आयोजित किया गया।  प्रो. राम अवतार शर्मा, सदस्य, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड द्वारा कार्यक्रम की अध्यक्षता की गयी तथा डॉ. अमित कान्त अवस्थी, सहायक प्राध्यापक, पर्यावरण विभाग, दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. ए. वी. कौर तथा डॉ. नीलम सिंह, सदस्य दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड विशेष रूप से उपस्थित रहे।

डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड द्वारा बताया गया कि कई प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों के बाद भी लोगों द्वारा एकल उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग बंद नहीं किया जा रहा है इसकी वजह यह है कि लोग अपना स्वभाव नहीं बदल रहे हैं । उन्होंने सभी से आह्वाहन किया कि वह एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग बंद करें तथा प्लास्टिक थैलों की जगह कागज़ के लिफाफों और थैलों का प्रयोग करें इससे लोगों को रोज़गार प्राप्त होने के साथ-साथ पर्यावरण में भी सु-प्रभाव पड़ेगा।  उन्होंने वेबिनार में उपस्थित पुस्तकालय के सभी कर्मचारियों तथा श्रोताओं से वेबिनार में बताई जाने वाली सभी बातों को अमल में लाने तथा स्वयं जागरूक बन अपने आस-पास सभी को जागरूक करने  का आग्रह किया। उन्होंने  कहा कि साफ़ सफाई बनाये रखना केवल सफाई कर्मचारियों का नहीं बल्कि हम सभी का कर्तव्य है। इसके साथ ही उन्होंने जैविक खाद बनाने की विधि भी श्रोताओं से साझा की।

मुख्य वक्ता डॉ. अमित कान्त अवस्थी द्वारा श्रोताओं को बताया कि किस प्रकार 1939 के द्वितीय विश्व युद्ध से शुरू हुआ प्लास्टिक का प्रयोग आज के समय में स्वास्थ्य हेतु एक बड़ा खतरा बन चुका है। उन्होंने बताया कि एकल प्रयोग प्लास्टिक ने “थ्रो अवे कल्चर” को जन्म दिया है जोकि 400-500 साल तक पर्यावरण में जिन्दा रहता है। उन्होंने बताया कि यद्यपि पूरे विश्व में भारत प्लास्टिक रीसाइक्लिंग में प्रथम स्थान पर है फिर भी प्लास्टिक का केवल 40% ही हम रीसायकल कर पाते हैं बचा हुआ 60% हिस्सा हमारे पर्यावरण में ही रहता है तथा उसे निरंतर हानि पहुंचाता है। मरियाना ट्रेंच से लेकर एवेरेस्ट तक प्लास्टिक के अंश पाए जाते हैं  इससे हम समझ सकते हैं कि किस प्रकार प्लास्टिक पर्यावरण के हर कोने में फ़ैल चुका है। उन्होंने एकल उपयोग प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में भी विस्तार से बताया।

प्रो. राम अवतार शर्मा द्वारा अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया गया कि गांव से लेकर शहर तक प्लास्टिक हमारे रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा बन गया है जोकि हमारे स्वास्थ्य के लिए एक चुनौती बना हुआ है। प्लास्टिक के कारण ही धरती का जल स्तर कम होता जा रहा है। यह इंसानों के लिए ही नहीं पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक के उपयोग  के साथ-साथ उसकी  रीसाइक्लिंग भी पर्यावरण के लिए हानिकारक है जिसके भयावह परिणाम हम वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण तथा भूमि प्रदूषण  के रूप में देख सकते हैं। हिमाचल प्रदेश द्वारा प्लास्टिक के उपयोग से सड़क बनाये जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में जब धरती पर प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ चुका है ऐसे में जरुरत है कि प्लास्टिक के गुणों को देखते हुए इसका पुनः प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने जन मानस द्वारा प्लास्टिक थैलियों की जगह जूट के बैग का उपयोग करने, एकल उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग बंद करने तथा एकल उपयोग प्लास्टिक के विरोध में जन आंदोलन शुरू करने का सुझाव दिया।

अंत में श्री आर. के. मीणा, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दि.प.ला. द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।  

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दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी ने स्वच्छता कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यक्रम का आयोजन

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी ने स्वच्छता कार्यक्रम के अंतर्गत श्री गोवर्धन विद्या निकेतन के प्रबंधक श्री विष्णु शर्मा, स्‍थानीय निगम पार्षद श्रीमती कुसुम तोमर,  प्रधानाचार्य श्रीमती संगीता रानी और इस कार्यक्रम में सम्मिलित पत्रकारों तथा विद्यालय के विद्यार्थियों को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया था । कोरोना महामारी, लोक डाउन और सामाजिक दूरी के कारण इस कार्यक्रम को संक्षिप्‍त रूप से आयोजित किया गया था । इसी कार्यक्रम की कुछ झलकियां :-

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दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा गोस्वामी तुलसी दास जयंती के उपलक्ष्य में दिनांक 27 जुलाई 2020 को गोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा गोस्वामी तुलसी दास जयंती के उपलक्ष्य में दिनांक 27 जुलाई 2020 को गोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन किया गया I गोष्ठी डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के सानिध्य में आयोजित की गयी एवं अध्यक्ष के रूप में श्री महेश चंद शर्मा, पूर्व महापौर, दिल्ली नगर निगम व सदस्य, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड तथा वक्ता के रूप में डॉ. वेद प्रकाश, सहायक प्राध्यापक, हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय उपस्थित रहे I कार्यक्रम में डॉ. राम अवतार शर्मा, सदस्य, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड विशेष रूप से उपस्थित रहे Iश्री महेश चंद शर्मा द्वारा अपने अध्यक्षीय भाषण में श्रोताओं को बताया गया कि किस प्रकार गोस्वामी तुलसी दास जी ने रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, गीतावली, दोहावली, साहित्य रत्न जैसे महान ग्रंथों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपरा को जीवंत करने का उच्चतम कार्य किया है I उन्होंने श्रोताओं को बताया कि रामचरितमानस भारत ही नहीं पूरे विश्व में पूज्य है I उन्होंने यह भी कहा कि आज जो हम हिन्दू समाज का स्वरुप देख रहे हैं वह भी गोस्वामी तुलसी दास जी की ही देन है Iडॉ. वेद प्रकाश ने रामचरितमानस की अनेकों चौपाइयों के माध्यम से श्रोताओं को गोस्वामी तुलसी दास जी द्वारा तत्कालीन समाज को जागृत करने हेतु दिए गए ज्ञान पर विस्तृत रूप से चर्चा की I उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी का युग ऐसा युग था जब आस्थाएं विखंडित हो रही थीं, मूल्यों का पतन हो रहा था, मंदिर देवालय तोड़े जा रहे थे, समाज में त्रासदियाँ फैली हुई थी I ऐसे समय में गोस्वामी जी ने अपने विचारों और संदेशों के माध्यम से समाज में जाग्रति फैलाई I उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी की रचनाओ में वर्णित व्यक्ति चिंतन, राष्ट्रचिन्तन पर आधारित संकल्पों को हमें पुनः अपने जीवन में लाने की आवश्यकता है I अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने भारतवर्ष के युवाओं का आह्वाहन करते हुए उनसे अपने अतुल्य आत्मबल को जागृत कर उच्चतम जीवन मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया Iडॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड ने सभी श्रोताओं को गोस्वामी जी रचित रामचरितमानस से बलिदान, कर्तव्यनिष्ठता, परित्याग आदि गुणों को अपनाकर चरित्र निर्माण करने का परामर्श दिया I उन्होंने सभी से निवेदन किया कि वह रामचरितमानस का पाठ करें तथा हमारी लुप्त हो रही परम्पराओं को पुनः अपनाकर भारतीय संस्कृति को बढ़ावा दें Iअंत में श्री आर. के. मीणा, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दि.प.ला. द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।#गोस्वामी_तुलसीदास#TulsiDasJayanti2020

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लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती के उपलक्ष्य में दिल्ली पब्लिक लाईब्रेरी द्वारा दिनांक 25 जुलाई 2020 को संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती के उपलक्ष्य में दिल्ली पब्लिक लाईब्रेरी द्वारा दिनांक 25 जुलाई 2020 को जन-साधारण हेतु संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाईब्रेरी बोर्ड द्वारा की गई तथा वक्ता के रूप में डॉ. विनोद बब्बर, वरिष्ठ साहित्यकार एवं डॉ. वेदव्रत तिवारी, सहायक प्राध्यापक, कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय उपस्थित रहे ।डॉ. रामशरण गौड़ द्वारा विषय की रूपरेखा रखते हुए श्रोताओं को बाल गंगाधर तिलक जी के जीवन संघर्ष से जुड़े कई किस्सों से रूबरू करवाया गया । उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख भूमिका निभाने वाले तिलक जी द्वारा दिए गए नारे “स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूंगा” का भी व्याख्यान किया । उन्होंने बताया कि तिलक जी ने शैक्षिक एवं सांस्कृतिक आंदोलनों के माध्यम से जन समूह में राष्ट्रीय एकता की ऊर्जा का संचालन किया । आध्यात्मिक दृष्टि से भी तिलक जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक “गीता रहस्य” इसका उत्तम उदहारण है जिसे सभी को पढ़ना चाहिए । उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तिलक जी द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला । साथ ही आज की परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने सभी श्रोताओं से स्वदेशी वस्तुओं का ही प्रयोग करने का आग्रह किया ।डॉ. विनोद बब्बर ने श्रोताओं को बताया कि बहुमुखी प्रतिभा के ज्ञानी तिलक जी ने “केसरी तथा मराठा” अखबारों के ज़रिए जन जन को जागृत एवं एकजुट किया । उन्होंने बताया कि जन साधारण को भारतीय उत्सवों से जोड़ने हेतु भी तिलक जी कार्यरत रहे । उन्होंने ही गणेश उत्सव को सामूहिक रूप से मनाने का प्रारंभ किया । बब्बर जी ने यह भी बताया कि तिलक जी मानवता को ईश्वर की सेवा के तुल्य मानने वाले व्यक्ति थे । उन्होंने श्रोताओं से कहा कि हम तिलक जी को सच्ची श्रद्धांजलि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर और दूसरों को भी ऐसा करने हेतु प्रेरित करके दे सकते हैं ।डॉ. वेदव्रत तिवारी ने अपने वक्तव्य का आरंभ करते हुए श्रोताओं को बताया कि तिलक जी सच्चे राजनीतिज्ञ ही नहीं एक शिक्षक तथा समाज सेवक भी थे । उन्होंने तिलक जी के जीवन के कई उतार चढ़ावों को श्रोताओं से साझा करते हुए तिलक जी के जीवन का विस्तृत वर्णन भी प्रस्तुत किया । उन्होंने अपने वक्तव्य में तिलक जी के जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं की चर्चा की ।अंत में श्री आर. के. मीणा, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दि.प.ला. द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।

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दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती के उपलक्ष्य में संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन

“दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती के उपलक्ष्य में शनिवार, दिनांक 25 जुलाई 2020 को सायं 4 बजे संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन किया जा रहा है। आप सभी सादर आमंत्रित हैं !

संगोष्ठी में सम्मिलित होने हेतु दिए गए लिंक पर क्लिक कर पंजीकरण करें: https://forms.gle/4CsTPoDBuBX1CeHZ8

कार्यक्रम का लिंक जल्द ही साझा किया जाएगा।”